सोमनाथ मंदिर: जानिए क्या है इसका इतिहास और परीक्षा में आने वाले सभी महत्वपूर्ण तथ्य

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  • यह एक महत्वपूर्ण हिन्दू मन्दिर है जिसकी गणना 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रुप में होती है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में प्रभास पटन में स्थित है।
  • इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। इसका उल्लेख ऋगवेद में भी मिलता है।
  • यह मंन्दिर हिन्दू धर्म के उत्थान पतन का प्रतीक रहा है। अत्यंत वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा और बनाया गया।
  • दूसरी बार इस मंदिर का पुनर्निमाण सातवीं सदी में वल्लभी के मैत्रिक राजाओं ने करवाया था।
  • आठवीं सदी में सिंध के अरबी गवर्नर जूनायद ने इसे नष्ट करने के लिए अपनी सेना भेजी। प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका तीसरा पुनर्निमाण किया।
  • अरब यात्री अलबरूनी ने अपने यात्रा वृतांत में इसका विवरण लिखा जिससे प्रभावित होकर महमूद गजनवी ने सन 1025 ईस्वी में कुछ 5000 साथियों के साथ सोमनाथ मंदिर पर हमला किया, उसकी संपत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया।

50 हजार से भी अधिक लोग उस समय मंदिर में हाथ जोड़कर पूजा अर्चना कर रहे थे, प्रायः सभी का क़त्ल कर दिया गया।

  • इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निमाण करवाया। सन 1297 ईस्वी में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर कब्ज़ा किया तो इसे पांचवीं बार गिराया गया। मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः 1706 ईस्वी में गिरा दिया।
  • इस नये भव्य मंदिर का डिजाईन प्रसिद्द आर्किटेक्चरर प्रभाशंकर ने तैयार किया था। 800 वर्षों के इतिहास में कैलाश महाभेरू प्रसाद की शैली में बन्ने वाला ये प्रथम मंदिर है।
  • इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे भारत के गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल (लौह पुरुष) ने बनवाया और एक दिसम्बर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।
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