भूगोल नोट्स: प्रायद्वीपीय भारत का पठार, भाग-1

प्रायद्वीपीय भारत का पठार

प्रायद्वीपीय भारत का पठार गोंडवाना लैंड का भाग है, जो अफ्रीका से टूट कर अलग हुआ और उत्तर पूर्व की ओर प्रवाहित हो रहा है।
  • पठारी भाग के उत्तर पश्चिमी सिरे पर अरावली पहाड़ियां है और उत्तर पूर्वी सिरे पर राजमहल की पहाड़ियां है।
  • मेघालय का शिलांग पठार भी प्रायद्वीपीय भारत के पठार का ही उत्तर पूर्वी विस्तार है।
  • प्रायद्वीपीय भारत के पठार के उत्तरी हिस्से का ढाल उत्तर की ओर है यही कारण है कि चंबल, बेतवा और सोन नदी उत्तर की ओर प्रवाहित होते हुए गंगा और यमुना नदी में मिल जाती हैं। सतपुड़ा पहाड़ी के दक्षिण में प्रायद्वीपीय भारत के पठार का ढाल पूर्व की तरफ हो जाता है।
  • सतपुड़ा पहाड़ी के उत्तर में नर्मदा भ्रंश घाटी और दक्षिण में तापी भ्रंश घाटी है। इन दोनों भ्रंश घाटियों का ढाल खंभात की खाड़ी की तरफ है।
  • तापी नदी के मुहाने से लेकर पश्चिम तट के साथ-साथ कार्डमम या इलायची पहाड़ी तक पश्चिमी घाट पर्वत जबकि पूर्वी तट के साथ-साथ पूर्वी घाट तट का विस्तार है।
  • पश्चिमी घाट पर्वत और पूर्वी घाट पर्वत श्रेणियां दक्षिण भारत में आपस में मिल जाती हैं, जिस वजह से एक पर्वतीय गांठ का निर्माण होता है जिसे हम नीलगिरी पर्वत कहते हैं।
  • नीलगिरी पर्वत के दक्षिण में पश्चिमी घाट पहाड़ी को अन्नामलाई, पहाड़ी कार्डमम या इलायची पहाड़ी के नाम से जाना जाता है। जो कि दक्षिण भारत की सबसे दक्षिणी पहाड़ी है।
  • नीलगिरी पर्वत का विस्तार 3 राज्यों तमिलनाडु केरल और कर्नाटक में है।

अरावली पर्वत

  • प्रायद्वीपीय भारत पठार के उत्तर पश्चिम सीढ़ी पर अरावली पर्वत का विस्तार है।
  • अरावली पर्वत दक्षिण पश्चिमी गुजरात के पालमपुर से उत्तर पूर्व में दिल्ली तक स्थित है। जिसकी कुल लंबाई 800 किलोमीटर है।
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  • अरावली पर्वत की अधिकतम लंबाई राजस्थान राज्य में है।

अरावली पर्वत का दक्षिणी भाग राजस्थान में जगी पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है।

दिल्ली के पास इस पहाड़ी को देल्ही रिज के नाम से जाना जाता है।

अरावली पर्वत की सर्वोच्च चोटी राजस्थान के माउंट आबू में है।

  • बनास नदी अरावली को पश्चिम से पूर्व में पार करती है और चंबल नदी में मिल जाती है।

  • दिल्ली का राष्ट्रपति भवन रायसीना हिल्स अरावली पर्वत पर ही स्थित है।

मालवा पठार

  • अरावली और विंध्य पर्वतों के बीच में स्थित मालवा पठार है। मालवा पठार का ढाल उत्तर की तरफ है।
  • मालवा पठार का निर्माण ज्वालामुखी के लावे से हुआ है अर्थात यह बेसाल्ट चट्टानों के बने हुए हैं यही कारण है कि मालवा के पठार पर काली मिट्टी पाई जाती है।

चंबल बेतवा और काली सिंध नदी मालवा पठार से निकलती है

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