दिल्ली सल्तनत (भाग-3): गुलाम वंश: शम्सुद्दीन इल्तुतमिश (1210-1236 ईस्वी)

Delhi Sultanate in Hindi Delhi Sultanate Notes in Hindi History of Aram Shah What do you mean by Iltutmish?

आरामशाह (1210 ईस्वी)

  • ऐबक की अकस्मात् मृत्यु के कारण उसके उत्तराधिकारी के चुनाव की समस्या को तुर्की सरदारों ने स्वयं हल किया। कुछ तुर्की सरदारों ने आरामशाह को लाहौर में 1210 ईस्वी में सुलतान घोषित कर दिया। आरामशाह एक अक्षम और आरामतलब व्यक्ति था।
  • अनेक तुर्क सरदारों ने उसका विरोध किया। दिल्ली के तुर्क सरदारों ने बदायूं के गवर्नर इल्तुतमिश, जो ऐबक का विश्वासपात्र गुलाम एवं उसका दामाद भी था, को दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा।
  • आरामशाह भी उसके दिल्ली आने की सुचना पाकर दिल्ली आ पहुंचा। परन्तु इल्तुतमिश ने उसे पराजित कर मार डाला और स्वयं सुलतान बन बैठा।


शम्सुद्दीन इल्तुतमिश (1210-1236 ईस्वी)

  • इल्तुतमिश का अर्थ साम्राज्य का स्वामी है। इल्तुतमिश या अलमश इल्बरी तुएक था। उसका पिता ईलाम खां इल्बारी जनजाति का सरदार था। इल्तुतमिश शम्शी वंश का था इसलिए नए वंश का नाम शम्शी वंश पड़ा।
  • कुतुबुद्दीन ऐबक ने इल्तुतमिश को खरीदने की इच्छा की तो सुलतान ने दासों के व्यापारी को आज्ञा दी कि वह इल्तुतमिश को दिल्ली ले जाए। दिल्ली में ही कुतुबुद्दीन ऐबक ने उसे अपने दास के रूप में खरीदा। इसे गुलामों का गुलाम कहा गया है।
  • दिल्ली में इल्तुतमिश शीघ्र ही ऐबक का विश्वासपात्र बन गया। उसे सरजानदार (शाही अंगरक्षकों का सरदार) नियुक्त किया गया। इल्तुतमिश की प्रशासनिक क्षमता से प्रभावित हो कर कुतुबुद्दीन ने उसे अन्य प्रशासनिक पद भी सौंपे। उसे अमीर ए शिकार का पद दिया गया।
  • 1205 ईस्वी में इल्तुतमिश को ऐबक ने दासता से मुक्त कर दिया। इसके बाद उसे बदायूं का प्रशासक नियुक्त किया गया। ऐबक ने अपनी एक पुत्री का विवाह भी उसके साथ कर दिया।
  • भारत में तुर्की शासन का वास्तविक संस्थापक इल्तुतमिश ही था। भारत में मुस्लिम प्रभुसत्ता का वास्तविक शुरंभ इल्तुतमिश से ही होता है।
  • इसने कुतुबमीनार को बनवा आकर पूरा किया और राज्य को सुदृढ़ व् स्थिर बनाया। इल्तुतमिश ने इक्ता व्यस्था शुरू की थी। इसके अंतर्गत सभी सैनिकों और गैर-सैनिक अधिकारीयों को नकद वेतन के बदले भूमि प्रदान की जाती थी।

इकता एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ भूमि है। यह भूमि इक्ता तथा इसे लेने वाले इक्तादार कहलाते थे

  • इल्तुतमिश ने चांदी के टका और तांबे के जीतल का प्रचालन किया एवं दिल्ली में टकसाल स्थापित किये थे। टकों पर टकसाल का नाम लिखने की परंपरा भारत में प्रचलित करने का श्रेय इल्तुतमिश को जाता है। सिक्को पर शिव की नंदी और चौहान घुड़सवार अंकित होते थे।
  • वह दिल्ली का प्रथम शासक था जिसने सुलतान उपाधि धारण कर 18 फरवरी 1229 ईस्वी को स्वतंत्र सल्तनत स्थापित किया।उसने बग़दाद के खलीफा (अल मुंत सिर बिल्लाह) से मान्यता प्राप्त की और ऐसा करने वाला वह प्रथम मुस्लिम शासक बना।
  • उसने 40 योग्य तुर्क सरदारों के एक दल चालीसा (चहलगानी) का गठन किया जिसने इल्तुतमिश की सफलताओं में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • 1221 ईस्वी में चंगेज खां के नेतृत्व में मंगोल सेना, ख्वारिज्म के राजकुमार जलालुद्दीन मंगबारानी का पीछा करते हुए दिल्ली की सीमा तक आ पहुंची थी। लेकिन इल्तुतमिश ने मंगबारानी को शरण देने से मना करके चतुराईपूर्वक दिल्ली मंगोलों के आक्रमण से बचा लिया था।
  • इल्तुतमिश को भारत में गुम्बद निर्माण का पिता कहा जाता है। उसने सुल्तानगढ़ी मकबरा अपने पुत्र नासिरुद्दीन महमूद कीकब्र पर निर्मित करवाया। यह भारत का प्रथम मकबरा था। जिसका श्रेय इल्तुतमिश को जाता है।
  • इसके अलावा इसने मुहम्मद गोरी के नाम पर मदरसा-ए-मुइज्जी दिल्ली में बनवाया।
  • उज्जैन का महाकाल मंदिर को ध्वस्त किया। दिल्ली को राजधानी बनाने वाला प्रथम सुल्तान इल्तुतमिश ही था। 30 अप्रैल, 1236 ईस्वी को इसकी मृत्यु हो गयी।
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