इस्लाम धर्म का उदय व विस्तार | हजरत मुहम्मद साहब का जीवन परिचय

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इस्लाम धर्म का उदय व विस्तार

  • 7वीं शताब्दी में सउदी अरब में इस्लाम नामक एक नये धर्म का उदय हुआ तथा शीघ्र ही इसका विस्तार उत्तरी अफ्रीका से अरब प्रायद्वीप तथा ईरान और भारत तक हुआ। इस्लाम पैगम्बर मुहम्मद साहब द्वारा स्थापित किया गया। उन्होंने इस धर्म के उपदेश को प्रचारित (570-632 ई0) किया।
  • इस्लाम एक ही ईश्वर की उपासना पर जोर देता है और उसकी पवित्र पुस्तक कुरान है। मुस्लिमों का विश्वास है कि स्वयं ईश्वर ने कुरान का इलहाम (शिक्षा) मुहम्मद साहब को दिया है। कुरआन को इस्लाम में सर्वोच्च दर्जा प्राप्त है।
  • प्रत्येक मुस्लिम को दिन भर में पांच बार नमाज पढने को कहा गया है। रमजान के महीने में रोजे रखने, दान करने और संभव हो तो मक्का (सऊदी अरब) की तीर्थयात्रा करने को कहा गया है।
  • पैगम्बर की मृत्यु 632 ई0 के पश्चात मुस्लिमों को राजनितिक तथा धार्मिक नेतृत्व प्रदान करने की जिम्मेदारी खलीफा (उप प्रमुख, यह उपाधि पैगम्बर मुहम्मद साहब के उत्तराधिकारीयों को दी गयी) पर आ गयी। 632 ई0 से 661 ई0 तक 4 खलीफा (1.अबूवक्र 2.उमर 3.उस्मान 4.अली) हुए जो मुहम्मद साहब के नजदीकी थे।

खलीफा व्यवस्था

पैगम्बर मुहम्मद के उत्तराधिकारी को खलीफा कहा जाता है। खलीफा को ही समुदाय का प्रमुख माना जाता है। बाद में ये धार्मिक और राजनितिक पद बन गया जो कि इस्लाम धर्म का सञ्चालन करने लगा।

सुन्नी और शिया में मतभेद

  • पैगम्बर मुहम्मद के बाद खलीफा बनने को लेकर सुन्नी और शिया में फूट पड़ गयी थी। सुन्नी का मानना था कि पैगम्बर मुहम्मद का कोई भी उपयुक्त अनुयायी खलीफा बन सकता है। उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद के सहयोगी अबुवक्र को पहला खलीफा घोषित किया। बकरा के बाद उमर खलीफा बना। दूसरी ओर शुरूआती शिया मानते थे कि पैगम्बर मुहम्मद का कोई रिश्तेदार ही खलीफा होना चाहिए। उनकी नजर में खलीफा के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति पैगम्बर के दामाद अली थे।
  • अली की हत्या के बाद उनके प्रतिद्वंदी मु-वैयाह ने सीरिया की राजधानी दमिश्क में उमैयद खलीफा की स्थापना हुई थी।
  • उमैयद खलीफाओं ने 661-750 ई0 तक शासन किया। उसके बाद अबु खलीफाओं ने उमैयद खलीफाओं को सत्ता से हटाया गया था।
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हजरत मुहम्मद साहब

  1. मुहम्मद का शाब्दिक अर्थ “प्रशस्त” होता है। हजरत मुहम्मद साहब का जन्म उत्तरी अरब के शहर मक्का में 29 अगस्त 570 ई0 में कुर्रावश कबीले के सबसे कुलीन वंश बंनू हाशिम में हुआ था।
  2. उस समाया का मक्का न सिर्फ व्यापर का केंद्र था बल्कि प्राचीन पवित्र स्थान काबा भी मक्का शहर में ही था। इस कारण से वहां आस पास के सभी देशों के व्यापारी और तीर्थ यात्री आते थे।
  3. मुहम्मद साहब के पिता अब्दुल्ला का देहांत उनके पैदा होने से पहले और उनकी माता आमिना का देहांत (जब वे मात्र 6 वर्ष के थे) जन्म के बाद ही हो गया था। उनके चाचा अबू तालिब ने ही उनका पालन पोषण किया। जिस कारण से मक्का के लोगों ने उनको अल अमिन का नाम भी दिया जिसका अर्थ भरोसेमंद इंसान है।
  4. 25 वर्ष की आयु में उनकी शादी खदीजा से हुई जो उनके कार्यों से बेहद प्रभावित थीं। मुहम्मद साहब का ज्यादातर समय शहर से बाहर हिरा नाम की एक गुफा में आध्यात्मिक चिंतन करते व्यतीत हुआ। 610 ई0 में पहली बार उन्हें ईश्वरीय अनुभूति हुई। उनकी पत्नी खदीजा ने सबसे पहले उन्हें पैगम्बर के रूप में पहचाना। वे अपने अंतिम समय तक मुहम्मद साहब का मिशन का स्तम्भ बन कर रहीं। मुहम्मद शहब जीवन की इस अनोखी शुरुआत के बाद 23 वर्ष तक जीवित रहे।
  5. मशहूर अमेरिकी लेखक माईकल हार्ट ने “द-100” नामक पुस्तक में उन्हें 100 अत्यंत कामयाब लोगों की सूचि में पहले स्थान पर रखा है। जब मक्का के लोगों ने मुहम्मद साहब और उनके साथियों का जीवन बहुत कठिन कर दिया तो उन्होंने मक्का से 280 मील दूर स्थित मदीना जाने का निर्णय लिया।
  6. उस समय रेगिस्तान में 280 मील की यात्रा आसन नहीं थी। मुश्किलों के बाद वे मदीना पहुंचे जहाँ लोगों ने उनका हार्दिक स्वागत किया। वहां उन्होंने किसी समस्या के बजाय ईश्वर शांति और भाईचारे की बात की थी। मुहम्मद शहब के एक साथी अबू जार गफ्फारी के अनुसार उन्होंने किसी पर कभी भी अपमानजनक टिपण्णी नहीं करने की सलाह दी थी। उस समय मुहम्मद साहब मदीना के शासक बन चुके थे।
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मुहम्मद साहब की शिक्षाएं

मुहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म के मानने वाले लोगों के लिए जीवन में पांच सिद्धांत निर्धारित किये हैं।
  • कलमा : अल्लाह एक है और मुहम्मद उसके पैगम्बर हैं।
  • नमाज: प्रतिदिन पांच बार नमाज पढना चाहिए।
  • रमजान: रमजान के पवित्र महीने में रोजा रखना चाहिए।
  • जकात: अपनी उपार्जित आय दो प्रतिशत गरीबों में दान करना चाहिए।
  • हज: पुरे जीवन में कम से कम एक बार मक्का की तीर्थयात्रा करनी चाहिए।

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