इतिहास नोट्स: गुप्त वंश, भाग-2

वाकाटक वंश

  • यह ब्राह्मण वंश के थे।
  • क्षेत्र – बरार (विदर्भ)
  • इस वंश की स्थापना विंध्यशक्ति ने किया था
प्रमुख राजा
  • प्रवर सेन प्रथम ने अश्वमेध यज्ञ कराया था।
  • प्रवचन द्वितीय ने सेतुबंध पुस्तक लिखा था।
अजंता एलोरा की गुफाएं
  • अजंता में 19 गुफा मंदिर है जिसमें से 16 17 और 19 वाकाटक वंश में बने थे।
  • चंद्रगुप्त द्वितीय के दूत कालिदास प्रवर सेन द्वितीय के दरबार में आए थे।

वर्धन वंश

  • क्षेत्र – थानेश्वर हरियाणा
  • इसकी स्थापना प्रभाकर वर्धन ने की थी
  1. इसके 2 पुत्र राज्यवर्धन और हर्षवर्धन जबकि एक पुत्री राज्यश्री थी।
  2. बंगाल के राजा शशांक ने राज्यवर्धन की हत्या कर दी थी। जिसके बाद हर्षवर्धन 606 से 647 ईसवी तक राजा बना।
  3. राज्यश्री का विवाह कन्नौज के मौखरी वंश के राजा गृह वर्मा से हुआ था।
  4. शादी के कुछ दिनों बाद गृह वर्मा की मृत्यु हो गई और राज्यश्री सती होने के लिए निकल पड़ी लेकिन बौद्ध भिक्षु दिवाकर की मदद से राज्यश्री को हर्षवर्धन ने बचा लिया।
  5. प्रारंभ में हर्षवर्धन शैव धर्म को मानता था लेकिन बाद में बौद्ध धर्म अपना लिया।

इसकी इसकी जानकारी व्हेन सांग की पुस्तक सी यू की से मिलती है। व्हेन सांग हर्षवर्धन के काल में ही भारत आया था।

बौद्ध धर्म की महायान शाखा से संबंधित एक सभा कन्नौज में हुई थी, जिसकी अध्यक्षता व्हेनसांग ने की थी।

हर्षवर्धन के समय प्रयाग में प्रति 5 वर्ष में महा मोक्ष परिषद नाम से धार्मिक आयोजन होता था जिसमें व्हेनसांग ने भी भाग लिया था।

दरबारी

1.बाणभट्ट – इन्होंने दो पुस्तक लिखे थे।
  • हर्षचरित
  • कादंबरी (भारत में लिखा प्रथम उपन्यास)
2.ब्रह्मगुप्त
यह एक गणितज्ञ थे। इन्होंने ब्रह्म सिद्धांत नाम से एक पुस्तक लिखा था।

प्रमुख अभिलेख

1.बांसखेड़ा अभिलेख
हर्षवर्धन के हस्ताक्षर का प्रथम नमूना। (भारत में प्रथम उदाहरण)
2.मधुबन अभिलेख
इस अभिलेख से गांव दान करने का साक्ष्य मिलता है।
3.ऐहोल अभिलेख
दक्षिण भारत के राजा पुलकेशिन द्वितीय के दरबारी रविकीर्ति ने इस अभिलेख का निर्माण करवाया था। इस अभिलेख से नर्मदा नदी के तट पर पुलकेशिन द्वितीय द्वारा हर्षवर्धन के हार की जानकारी मिलती है।

त्रिपक्षीय संघर्ष

यह संघर्ष भारत के तीन प्रमुख वंश गुर्जर प्रतिहार वंश, पाल वंश और राष्ट्रकूट वंश के बीच हुआ था।
कारण
  • कन्नौज पर अधिकार कर उत्तर भारत में राज्य स्थापित करना।
त्रिपक्षीय संघर्ष का आरंभ पाल वंश ने किया था और अंतिम रूप से विजय गुर्जर प्रतिहार वंश की हुई थी।

पाल वंश

यह बौद्ध धर्म के उपासक थे। इन की राजधानी पाटलिपुत्र थी और इस वंश की स्थापना गोपाल ने की थी।
प्रमुख राजा
1.धर्मपाल
इसी ने त्रिपक्षीय संघर्ष की शुरुआत की थी।बिहार के भागलपुर में स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना भी इसी ने करवाया था।
2.देवपाल
3.महिपाल प्रथम
4.महिपाल द्वितीय
इसी के समय में कैवर्त्त विद्रोह हुआ था।
5.रामपाल
दरबारी संध्या कर नंदी ने रामपाल चरित पुस्तक लिखी जिसमें कैवर्त्त विद्रोह का उल्लेख है।
पाल वंश के बाद बंगाल में सेन वंश का शासन था।

राष्ट्रकूट वंश

इसकी राजधानी मान्यखेत और राजभाषा कन्नड़ थी। इस वंश की स्थापना दंतिदुर्ग ने किया था।
प्रमुख राजा
कृष्ण प्रथम – एलोरा में कैलाश मंदिर का निर्माण।
गोविंद द्वितीय – इस वंश का सर्वाधिक प्रतापी राजा था।
इसके बाद ध्रुव और अमोघ वर्ष नाम के भी दो राजा हुए हैं।


गुर्जर प्रतिहार वंश

  • नागभट्ट अथवा हरिश्चंद्र को इस वंश का संस्थापक माना जाता है।
  • प्रारंभ में उज्जैन इस वंश की राजधानी थी जबकि बाद में कन्नौज को राजधानी बनाया गया।
  • गुर्जर प्रतिहार वंश के पतन के दौरान इनके सामंतों ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली थी।
  Static GK Quiz for SSC & Railways Part – 3

जोजाक भुक्ति के चंदेल वंश

भारत में सर्वप्रथम देवनागरी लिपि का प्रयोग इन्होंने ही किया था।
खजुराहो के मंदिर का निर्माण भी इसी वंश के शासकों ने करवाया था।
इसके अलावा आल्हा उदल भी इसी वंश के सेनापति थे।

इतिहास नोट्स: गुप्त वंश, भाग-1

Leave a Reply